RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat at Yuva Sankalp Shivir

If you want to understand Sangh, come to Shakha: Mohan ji Bhagwat

Agra November 02: Mohan Ji Bhagwat in his introductory speech at the YuvaSankalpShivir here said that we need to understand Sangh and its work. There is no other organization similar to the Sangh in the world. There is a certain perspective and inquisitiveness required to understand the Sangh which is working towards organizing the Hindu society. He invited everyone present to attend a Shakha. He said the country would be built in the way the Hindu society maintains it.

RSS Sarasanghachalak  Mohan Bhagwat at Yuva Sankalp Shivir
RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat at Yuva Sankalp Shivir

He said that there can be no Hindu without Bharat and there is no Bharat without Hindus. Bharat is not the name of the land but it’s a place where the Bharateeyas reside. The character and tradition of Bharat is Hindutva. We need to maintain the decorum in the society to stay united. Whatever we choose to call our tradition as Hindu tradition or Bharateeya tradition or Aryan tradition, there is no difference and all are same. Let everyone walk in their own path of truth. Hindutva has a distinct identity in the world today. The society which believes in this land is the society which also believes in its culture, tradition and respects the same. In contrast, a country like Pakistan has no identity and has lost its character. We may have numerous languages, traditions, states but we are still one country. He spoke about the progress of Sangh and said the today in the country with a population of 121 crore, there are 40 lakh Swayamsevaks, 30 thousands daily Shakhas and 60 thousand weekly Milans. He said that the Sangh has a target of reaching 1 crore Swayamsevaks by the time it turns 100 in 2025.

He said that we should make our festivals more meaningful. Sangh also celebrates its festivals like Sankranti which also aims to generate harmony and unite the society. He also said that reservations are required to erase the imbalances in the society. But reservations have not been implemented in the right manner and has got politicized. He suggested that a survey should be conducted by non-political luminaires to decide the true beneficiaries for reservations. He also said the directives to control population should be implemented by one and all in the country. We are all sons of Mother India. Our ancestors and culture is same. There is no difference amongst us. Hence there is no place for untouchability. Sangh primarily does the work of uniting the society while a Swayamsevak experiments as per his capacity and talent.

Anyone who the nations interest in the mind is a youth: Mohan ji Bhagwat

Mohan Ji Bhagwat said that anyone who has the interest of the nation and society in the mind, such a person is a youth. By participating the in the independence struggle at the age of 80, BabuKunwar Singh proved this. Disciplined and organized youth force of the country can play a very important role in the nation building exercise.

While addressing youth at the YuvaSankalpShivir in Agra, Mohan ji said that Bharat is an ancient land but since we forgot our sense of nationhood we became slaves and hence we should avoid slipping into similar situation again. For this we need to have the sense of nationhood and patriotism. Instead of just pontificating ideas we need to act on them and set an example he said.

“One should render service to the society with the sense of love, affection and belongingness towards the nation and society. Any task done with a sense of belongingness become easy how much ever difficult it may be. We should act every time keeping in mind the interest and security of the nation. Those who have been honored today have worked with the same sense.”

He said that we should not work for the society to gain name or fame. We need to fight with our own ego. Service which is done with the intention to gain name or fame will never have the sense of belongingness in it. He further gave numerous examples of true service to the society and urged the youngsters present to come together and work for the society.

Dharamwati Devi, widow of Indian Army soldier Hemraj who was decapitated by the Pakistani Army who was a resident of Mathura, Ramesh Baba who runs the Yamuna BhachoAndolan, VarunaBahan director of VanavasiStudent KalyanAshram of Rudrapur, Bharat Phatak director of NanajiDeshmukh Gram Vikas Project of Chitrakoot, DivyaPrem and Ashish Gautam of Haridwar who works for the leprosy patients, Sunil Sharma of KalyanKaroti who works for uplift of the differently abled were honored by Sarsanghchalak Mohan Bhagwat.

  • नागरिकों के मध्य वार्ता
  • विविधता में एकता संघ का मूल मंत्र
संघ को समझना है तो शाखा आयेंः मोहन भागवत 
आगरा 2 नवम्बर। आज प्रातःकाल युवा संकल्प शिविर में पं.दीनदयाल उपाध्याय परिसर आस्था सिटी रूनकता मथुरा रोड आगरा पर महानगर आगरा के गणमान्य महानुभावों के मध्य जलपान पर वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया हुआ राष्ट्रीय स्यंवसेवक संघ के सरसंघचालक ने प्रस्तावना में संघ की जानकारी देते हुये बताया कि हम संघ को समझे। संघ के काम को समझें। ,संघ जैसा संगठन दुनिया में कोई नहीं है संघ को समझने की दृष्टि एवं जिज्ञासा चाहिए संघ हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है आपने सभी को शाखा में आने का निमंत्रण दिया। उन्होने कहा कि हिन्दू समाज देश को जैसा रखेगा वैसा ही बनेगा संघ निर्माता डाॅ. हेडगेवार गरीबी में पले बडे कमाने वाला कोई नहीं था। पढ़ाई में सदैव अग्रणी रहे देश हित में सारे कार्य किये कलकत्ता डाक्टरी की पढाई करते हुये क्रान्तिकारीयों व काग्रंेस में रह कर आन्दोलनकारियों के सम्पर्क में रहे।
सम्पूर्ण भारत में समन्वय में काम करने वाली अनुशीलन समिति में सक्रिय रहे साथ ही देश हित में काम करने वाले कार्यक्रम व गणेश उत्सव व लोक प्रबोधन के लिये भाषण करना और सब नेताओं से सम्पर्क करते रहे। भगतसिंह चंद्रशेखर वीरसावरकर आदि सब प्रकार की विचार धाराओं के लोग मित्र बने डाॅ. साहब के मन में विचार आया कि हम गुलाम क्यांे बनें। हमारे साथ सब प्रकार की समृद्वि थी, फिर देश गुलाम क्यो हुआ। हममें क्या दोष है उन्होने समाज में एकता व सुदृढ़ता लाने के लिये अनेक प्रयोग किये और विवधता में एकता का मंत्र दिया। संघ की दैनिक शाखा संघ की कार्य पद्यति की विशेषता है। शाखा के माध्यम से संस्कार सामूहिक रूप से कार्य करने का स्वभाव और भारत माता के सभी पुत्र मेरे सभी सगे भाई है परस्पर आत्मीयता का भाव संघ ने दिया 
प्रस्तावना मंे जानकारी दी कि आगामी अप्रैल 2015 में संघ के स्वयंसेवकों द्वारा दिल्ली में विशाल सेवा शिविर लगने वाला है स्वयंसेवकों द्वारा 1,38,000 सेवा कार्य चल रहे है संघ निरंतर प्रभावी हो रहा है समाज के उन्न्यन के लिये कार्य कर रहा है। शाखा में स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव करें उन्होनें नागरिकों की जिज्ञसा के समाधान में बताया कि भारत के बिना हिन्दू नहीं, हिन्दू के बिना भारत नहीं। भारत जमीन के टुकडे का नाम नहीं है, भारत यानि जहां भारतीयता वाले लोग रहते हो, भारत की गुण-सम्पदा को हिंदुत्व कहते है। एकता के लिए छोटी छोटी बातों पर संयम रखना होगा संस्कृति सब की एक चाहे, उसे हिन्दू संस्कृति कहें भारतीया संस्कृति अथवा आर्य संस्कृति कोई अन्तर नहीं पडता। सब अपने सत्य पर चलें। दुनिया में हिन्दुत्व की पहचान बन गई है। इस भूमि से नाता मानने वाला समाज इतिहास संस्कृति और परम्परा को मानने वाला समाज है जब कि पाकिस्तान जैसे देश अपनी पहचान खो चुके है अपने देश में अनेक पंत भाषा, सम्प्रदाय प्रांत है फिर भी देश एक है। सत्य क्या है कोई जड की पूजा करता है तो कोई चेतन की, किन्तु जीवन एक है सब अपने अपने हिसाब से साहित्य का निर्माण करते है, संघ की प्रगति के बारे में कहा 121 करोड़ के देश में 40 लाख स्यवंसेवक है और 30 हजार शाखायें है तथा 60 हजार साप्ताहिक मिलन शाखायें हैं।
सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के लिए एक करोड स्यंवसेवकों का लक्ष्य संघ के सौ वर्ष पूरे होने तक हो जायेगा। उन्होनें कहा कि पर्व व त्यौहारों को और अधिक सार्थक बनाने का प्रयास किया जाए। संघ भी अपने उत्सव मनाता है। जैसे संक्रातिं उत्सव को समाज की समरसता एकता के लिये मनाते है।
आरक्षण समाज की विशमता मिटाने के लिए है आरक्षण सही प्रकार से लागू नहीं हुआ अपितु राजनीति लागू हो गई है। उन्होने समाधान बताया कि गैरराजनैतिक लोगों के वर्चस्व वाली समिति द्वारा निरीक्षण व सर्वेक्षण किया जाये फिर आकलन हो कि आरक्षण किस को मिला किस को नहीं उन सुझावों से सुप्रीम कोर्ट से मेल खाता है नागरिकों के प्रश्न के उत्तर में कहा कि संघ किसी को आदेश नहीं देता है। जनसंख्या संतुलन के लिए बनाई  गई नीति सब पर समान लागू होनी चाहिये हम सब भारत माता के पुत्र है हमारे पूर्वज व संस्कृति एक है एक दूसरे के प्रति कोई भेद नहीं है इसलिय छूआ छूत के लिये कोई स्थान नहीं है। संघ एक ही काम करता है कि समाज का संगठन, जब कि स्यंवसेवक अपनी प्रतिभा क्षमता का प्रयोग कर रहा है।
देश हित की मानसिकता रखने वाला हर व्यक्ति युवा: मोहन भागवत
आगरा। राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि देश व समाज के हित में कार्य करने की मानसिकता रखने वाला हर उम्र का व्यक्ति युवा है। अस्सी वर्ष की आयु मे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर बाबू कुवर सिंह ने यही साबित किया। किनारों को तोड कर उफनती नदी विनाश करती है जब कि तटों के बीच में बहने वाली नदी उपयोगी होती है। अनुशासित चरित्रवान एवं राष्ट्रहित मानसिकता वाले युवा राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभा सकते है।
श्री भागवत आज सायं शिविर के युवा विद्याथर््िायों को सम्बोधित कर रहे थे उन्होने कहा कि भारत राष्ट्र अति प्राचीन है लेकिन राष्ट्रभाव विलुप्त होने से हम गुलाम बने फिर से ऐसी स्थिति न आये। इसके लिये राष्ट्रभाव के देशप्रेम की आवश्यकता है। हम उपदेश देने के स्थान पर स्वंय अनुकरण कर उदहारण बने।
अधीश सभागार में  सरसंघचालक मोहन भागवत
‘‘देश और समाज के लिए प्रेम, आत्मीयता और अपनेपन की भावना से सेवा कार्य किये जाने चाहिए, न कि किसी तरह का सम्मान पाने की भावना से। स्वाभाविक आत्मीयता से किया गया कठिन कार्य भी सरलता से हो जाता है, हमें हर पल अपने देश के हित तथा उसकी सुरक्षा को देखकर करना चाहिए। आज जिन्हें सम्मानित किया गया है ये सभी इसी भावना से कार्य कर रहे है,‘‘
उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने ‘युवा संकल्प शिविर’’ के अधीश सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त किये।
 उन्होने कहा कि अपना कार्य करने के लिए सम्मान पाने का भाव हममें आना ही नहीं चाहिए। अहंकार के भाव से हमें हर अपने से लड़ना पड़ता है।जो सेवा कार्य कोई सम्मान या पद प्राप्ति के लिए किया जाता है वह सही माने में उसमें आत्मीयता या अपनेपन का भाव नहीं होता।
श्री भागवत ने आगे कई प्रसंगों के माध्यम से सच्ची  सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए युवाओं से समाज तथा राष्ट्र के लिए जुट जाने का आह्वान किया।
पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा सिर काटे जाने वाले मथुरा निवासी सेना के जवान हेमराज सिंह की विधवा धर्मवती देवी, यमुना बचाओ आन्दोलन  चलाने वाले रमेश बाबा, वनवासी छात्रा कल्याण आश्रम रूद्रपुर की संचालिका वर्’ाा बहिन, नानाजी देशमुख ग्राम विकास प्रकल्प चित्रकूट के संचालक भरत पाठक, कुष्ठरोगियों के लिए कार्य कर रहे दिव्य प्रेम ,हरिद्वार के आशी’ा गौतम, विकलांगों के लिये कार्य करने वाली कल्याण करोति के सुनील शर्मा का सरसंघचालक मोहन भागवत जी द्वारा सम्मानित किया गया। मंच पर क्षेत्रसंचालक दर्शन लाल अरोडा, शिविर अधिकारी दुर्ग सिंह चैहान,डा0 एपी सिंह प्रंात संघचालक आदि उपस्थित थे
सम्मान समारोह समापन के पश्चात विलम्ब से पधारें जनरल वी.के.सिंह शिविर स्थित सरसंघचालक आवास पर सम्मान किया गया।
DAY-1
आगरा-31 अक्टूबर। ‘विदेशियों ने हमसे हमारा आइना छीन कर अपने आइने से जो दिखाया उस के कारण हम अपने राष्ट्रीय गौरव को भूल चुके हंै अब हमें अपने आईने से युवा पीढ़ी को राष्ट्र के गौरव पूर्ण इतिहास से परिचत कराना होगा,ताकि  विश्व के समक्ष युवा अपना सीना तानकर खड़े हो सकंे। हमारे महापुरुष अपनी संकृति की रक्षा-संरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे हैं, जिनकी हुंकार से दुनिया दहली है और  उन के जीवन चरित्र से संसार संस्कारित हुआ है। भारत ने दुनिया को संस्कारित किया है। भारत के गौरवमयी इतिहास से परिचित कराना ही इस प्रदर्शनी का  उद्देश्य है।
उक्त उद्गार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ब्रजप्रान्त द्वारा आयोजित युवा संकल्प शिविर में लगी प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य वक्ता क्षेत्रीय प्रचारक प्रमुख श्री किशन चन्द जी से व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि जब विदेशी आंक्रताओं ने दुनिया के अन्य देशों को पचास- साठ साल में ही जीत लिया था । भारत को जीतने में उन्हें छःसौ साल से भी ज्यादा समय लगा। उसके बाद भी भारत लोग स्वतंत्रता के लिये निरन्तर संघर्षरत  रहे ओर अपनी स्वाधीनता प्राप्त की ।
श्री कृष्ण चन्द ने भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुये कहा जब दुनिया के लोग असभ्य थे तब भारत तमाम क्षेत्रों में अन्य देशों से बहुत आगे था। इसी ने दुनिया को सभ्यता-संस्कृति, ज्ञान – विज्ञान से परिचित कराया। इसी के चलते भारत को जगत गुरु कहलाया। वर्तमान में भी इसके अनेक प्रमाण उपलब्ध हंै।
उन्होने कहा कि वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवाओं का देश है।      इसलिए आगे का भविष्य भी भारतीय युवाओं का होगा।
श्री चंद ने कहा कि देश गुलाम ना रहे, आगे गुलामी ना आये, देश के लोगों में राष्ट्रीयता का भाव जागृत हो इसी उददेश्य से डा0 हेडगेवार जी ने संघ की स्थापनाकी थी।
प्रदर्शनीय के उद्घाटन कर्ता मुख्य अतिथि स्वामी हरिबोल जी महाराज ने कहा कि देश पिछले कई वर्षो से कुशासन भ्रष्टाचार से त्रस्त था। साधु समाज घुटन अनुभव कर रहा था हिन्दू धर्म संस्कृति नष्ट हो  रही थी। अबसर मिलते ही संतों ने जनजागरण किया। जिसके फलस्वरूप आज सुखद परिणाम आये है। उन्होने अमेरिका का उल्लेख करते हुये कहा कि पहले वह मोदी को बीजा नहीं दे रहा था अब सत्ता बदलते ही उनके स्वागत में अमेरिका ने पलक पावडे बिछाये। मोदी सरकार के बारे में कहा कि थोडे दिनों में अच्छे दिन आने लगे हंै। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेन्द्र बंसल चाॅदी वाले ने की तथा विशिष्ट अतिथि थे अशोक जैन डाक्टर सोप। मंच पर प्रांत संघ कार्यवाह राजपाल सिंह मौजूद थे। कार्यक्रम संचालन कुंजविहारी दुवेदी ने किया वही सरस्वती विद्या मंदिर के छात्रों भजव व गीत प्रस्तुत किये।
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Pradarshini Inauguration
Pradarshini Inauguration

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